शिमला, 23 मार्च: हिमाचल प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किया गया बजट 2026–27 युवाओं की उम्मीदों और सरकार की वित्तीय सीमाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता नजर आता है।
इस बार बजट में बड़े पैमाने पर सरकारी भर्तियों की घोषणा नहीं की गई। इसके बजाय सरकार ने रोजगार के पारंपरिक मॉडल से हटकर स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार की दिशा में संकेत दिए हैं।
कई युवा जो वर्षों से सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह बदलाव तुरंत स्वीकार करना आसान नहीं होगा।
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्तियां पूरी तरह बंद नहीं होंगी, लेकिन उन्हें जरूरत के अनुसार और चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस जैसे विभागों में भर्ती जारी रहने की बात कही गई है।
हालांकि, बड़े स्तर पर भर्ती अभियान की कोई घोषणा नहीं हुई, जो बजट से पहले काफी चर्चा में थी।
स्किल और स्टार्टअप पर बढ़ता फोकस
बजट में स्किल डेवलपमेंट को रोजगार का प्रमुख आधार बनाने की कोशिश की गई है।
पर्यटन, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसे सेक्टरों में अवसरों की पहचान की गई है, जहां प्रशिक्षित युवा काम कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहना अब व्यवहारिक नहीं है।
इसके साथ ही स्टार्टअप और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात कही गई है, ताकि युवा खुद रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
कांगड़ा और मंडी जैसे जिलों में, जहां बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, इस बदलाव का असर साफ दिखाई दे सकता है।
डिजिटल और पर्यटन सेक्टर में उम्मीद
बजट में डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर भी इशारा किया गया है। आईटी और ऑनलाइन काम के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है।
हिमाचल जैसे राज्य में, जहां भौगोलिक चुनौतियां हैं, डिजिटल रोजगार मॉडल एक व्यावहारिक विकल्प बन सकता है।
इसके साथ ही पर्यटन सेक्टर में निवेश से अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ने की उम्मीद है, जो राज्य के लिए पहले से ही एक मजबूत क्षेत्र रहा है।
उम्मीदें और हकीकत
हालांकि बजट में कई पहलें हैं, लेकिन युवाओं को स्पष्ट रोजगार संख्या या बड़ी भर्तियों की उम्मीद थी।
ऐसे में यह बजट दिशा तो देता है, लेकिन तुरंत राहत नहीं देता।
निष्कर्ष
हिमाचल बजट 2026–27 रोजगार के पारंपरिक मॉडल से बदलाव का संकेत देता है। स्किल, स्वरोजगार और नए सेक्टरों पर फोकस भविष्य के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये अवसर युवाओं तक कितनी तेजी से पहुंचते हैं।
फिलहाल इतना साफ है कि रोजगार का ढांचा बदल रहा है, लेकिन उम्मीदें अभी भी वही हैं।
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