शिमला | एनॉक्स न्यूज़
हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के स्तर को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए राज्य सरकार सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध कर रही है। सरकार का यह कदम छात्रों के भविष्य के लिए तो बेहतरीन माना जा रहा है, लेकिन इसके प्रशासनिक फैसलों ने शिक्षकों, विशेषकर सी एंड वी (क्राफ्ट एंड वर्नाक्युलर) शिक्षकों के बीच भारी भ्रम और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
इस पूरे विवाद की जड़ राज्य सरकार द्वारा इन नए सीबीएसई स्कूलों के लिए एक बिल्कुल अलग ‘सब-कैडर’ बनाने का फैसला है। राज्य सरकार पहले चरण में 100 से अधिक सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में तब्दील कर रही है, और इसके लिए 560 नए शिक्षकों के पदों को मंजूरी दी गई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की पढ़ाई बीच सत्र में प्रभावित न हो, इसके लिए इन स्कूलों में शिक्षकों की फिक्स (स्थायी) पोस्टिंग की जाएगी। लेकिन, मौजूदा राज्य कैडर के शिक्षकों को इस नई व्यवस्था में कैसे शामिल किया जाएगा, इसे लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई पारदर्शी दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
इस अनिश्चितता को दूर करने के लिए सी एंड वी शिक्षकों की ओर से सुषमा ठाकुर ने शिक्षा विभाग को एक पत्र लिखकर औपचारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कुछ बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई सी एंड वी शिक्षक इन सीबीएसई स्कूलों में नियुक्त या तैनात होता है, तो क्या वह अपने मूल जिला कैडर में ही बना रहेगा? इसके अलावा, उन्होंने यह भी पूछा है कि क्या नियुक्ति के समय शिक्षकों को उनकी मेरिट के आधार पर अपना जिला बदलने का कोई विकल्प दिया जाएगा या नहीं।
मौजूदा समय में सी एंड वी शिक्षकों की वरिष्ठता और तबादले जिला कैडर के आधार पर ही तय होते हैं। शिक्षकों का कहना है कि नियमों की इस अस्पष्टता के कारण वे भविष्य में होने वाले तबादलों और पदोन्नति (प्रमोशन) को लेकर डरे हुए हैं। बिना किसी ठोस नीति के अगर वे इस नए कैडर में चले जाते हैं, तो उनकी सालों की वरिष्ठता खतरे में पड़ सकती है।
इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह भी शर्त रखी है कि जो भी मौजूदा शिक्षक इन स्कूलों में जाना चाहते हैं, उन्हें एक विशेष चयन परीक्षा पास करनी होगी। सरकार का तर्क है कि इससे मेधावी शिक्षकों का चयन होगा, लेकिन शिक्षकों का मानना है कि सेवा शर्तों को सुरक्षित किए बिना इस तरह के बदलाव असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं।
शिक्षक संघों का भी मानना है कि राज्य शिक्षा बोर्ड और सीबीएसई के रूप में एक ही सरकार के अधीन दो अलग-अलग कैडर व्यवस्थाएं लागू करने से कर्मचारियों का मनोबल गिर सकता है। शिक्षकों की मांग है कि शिक्षा विभाग तुरंत प्रभाव से एक विस्तृत और स्पष्ट अधिसूचना जारी करे, जिसमें वरिष्ठता संरक्षण और पदोन्नति के नियमों को पूरी तरह से साफ किया गया हो।
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