महाराष्ट्र के बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे ने देश में छोटे हवाई अड्डों और निजी हवाई पट्टियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में राकांपा नेता अजित पवार के भतीजे की जान जाने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने अब देशभर के 200 से ज्यादा ऐसे एयरफील्ड्स (हवाई पट्टियों) के ‘सेफ्टी ऑडिट’ के आदेश दिए हैं, जो ‘अनकंट्रोल्ड’ श्रेणी में आते हैं।
‘अनकंट्रोल्ड’ एयरफील्ड्स वे होते हैं जहाँ विमानों के आने-जाने को नियंत्रित करने के लिए कोई एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर नहीं होता। यहाँ पायलटों को खुद ही रेडियो संपर्क और अपनी सूझबूझ से लैंडिंग और टेक-ऑफ करना पड़ता है। बारामती हादसा इसी तरह की एक हवाई पट्टी पर हुआ, जिसके बाद अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, डीजीसीए (DGCA) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की टीमें इन सभी जगहों का दौरा करेंगी। इस जांच में मुख्य रूप से रनवे की हालत, आस-पास की बाधाएं, और आपातकालीन स्थिति में फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस जैसी सुविधाओं की उपलब्धता की समीक्षा की जाएगी। अगर किसी हवाई पट्टी पर सुरक्षा मानकों में कमी पाई गई, तो उसे तब तक बंद रखा जा सकता है जब तक जरूरी सुधार न हो जाएं।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि विमानन क्षेत्र में विस्तार के साथ-साथ सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बारामती हादसे की विस्तृत जांच पहले से ही एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है, लेकिन मंत्रालय का यह कदम पूरे देश के छोटे विमानन केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए है।
अक्सर देखा गया है कि निजी विमान और ट्रेनी पायलट इन छोटी हवाई पट्टियों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। तकनीकी खराबी या खराब मौसम की स्थिति में, बिना ग्राउंड सपोर्ट के यहाँ लैंडिंग करना जोखिम भरा हो जाता है। सरकार का यह नया अभियान अब इन हवाई पट्टियों के लिए नए नियम और मानक तय कर सकता है, ताकि हवाई सफर को और सुरक्षित बनाया जा सके।
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