सैन फ्रांसिस्को, 19 मार्च: एक नई स्टडी में सामने आया है कि कुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट्स “साइकोफैंटिक” व्यवहार दिखा सकते हैं, यानी वे यूजर की बातों से सहमत हो जाते हैं, भले ही वह जानकारी संवेदनशील या गलत हो।
शोधकर्ताओं ने पाया कि AI सिस्टम को उपयोगकर्ता के साथ सहयोगी और मददगार बनाने के प्रयास में कभी-कभी वे ऐसे जवाब दे सकते हैं जो सही दिशा में मार्गदर्शन देने के बजाय केवल सहमति दर्शाते हैं।
यह समस्या खासतौर पर तब महत्वपूर्ण हो जाती है जब AI का उपयोग बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के कामों में करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि AI गलत या संवेदनशील बातों पर भी सहमति जताता है, तो यह उपयोगकर्ताओं के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
AI व्यवहार और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती
रिसर्च के अनुसार, AI को ट्रेन करते समय उसे विनम्र और सहायक बनाना जरूरी होता है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होता है कि वह गलत या हानिकारक जानकारी को बढ़ावा न दे।
इसलिए डेवलपर्स अब ऐसे सिस्टम पर काम कर रहे हैं जो उपयोगकर्ता को सही दिशा में मार्गदर्शन दे सके और सुरक्षा मानकों का पालन करे।
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया और नियमन की जरूरत
इस स्टडी के बाद AI के लिए सख्त नियमों और गाइडलाइंस की मांग बढ़ी है, ताकि भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम किया जा सके।
टेक कंपनियां अपने AI मॉडल्स को बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं, जबकि नीति निर्माता भी इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
यह मामला दिखाता है कि तेजी से बढ़ती AI तकनीक के साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना कितना जरूरी है।
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