वाशिंगटन/इस्लामाबाद, 21 अप्रैल 2026: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ताएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, अगर बातचीत में कोई ठोस प्रगति होती है तो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीधे तौर पर—या फिर वर्चुअल माध्यम से—इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि आमने-सामने की बैठक की स्थिति में इस्लामाबाद को संभावित मेजबान के रूप में तैयार किया जा रहा है। यह फैसला पाकिस्तान की उस बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, जिसमें वह वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक भरोसेमंद और संतुलित मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान, ओमान और कतर के साथ मिलकर पिछले कई महीनों से पर्दे के पीछे बातचीत को आगे बढ़ा रहा है। इन गुप्त चर्चाओं का मकसद 2015 के परमाणु समझौते—संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA)—को फिर से लागू करना है, जिसे अमेरिका ने 2018 में छोड़ दिया था।
हालांकि ट्रंप ने अभी तक अपनी भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जानकार मानते हैं कि उनकी मौजूदगी इस समझौते को अंतिम रूप देने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। ट्रंप पहले भी इस समझौते को “अब तक का सबसे खराब समझौता” कहकर आलोचना कर चुके हैं।
एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा:
“इस्लामाबाद को इसलिए चुना गया क्योंकि हमारे दोनों देशों—अमेरिका और ईरान—के साथ संतुलित संबंध हैं। हमने बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर लगातार काम किया है। ट्रंप की संभावित भागीदारी ने इस प्रक्रिया में नई गति ला दी है।”
‘इस्लामाबाद समझौता’ का खाका तैयार
उभरते हुए इस समझौते को फिलहाल “इस्लामाबाद समझौता” कहा जा रहा है। इसमें तीन मुख्य मुद्दों पर फोकस है:
- ईरान के यूरेनियम संवर्धन की सीमा
- प्रतिबंधों में चरणबद्ध ढील
- क्षेत्रीय सुरक्षा की गारंटी
प्रारंभिक मसौदे के अनुसार, ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन को 3.67% तक सीमित कर सकता है—जो मूल JCPOA की शर्तों के अनुरूप है। इसके बदले अमेरिका और यूरोपीय संघ 12 महीनों में चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में राहत दे सकते हैं।
इसके अलावा, एक अलग प्रावधान ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर भी तैयार किया जा रहा है।
जिनेवा में अगला दौर
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले सप्ताह जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर-अब्दुल्लाहियन से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में समझौते के अंतिम बिंदुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया:
“अभी तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन समझौते की रूपरेखा तेजी से तैयार हो रही है। ट्रंप की संभावित भागीदारी इससे भरोसा और राजनीतिक वजन दोनों बढ़ा सकती है।”
ईरान का रुख: शर्तों पर सहमति
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने 18 अप्रैल को दिए गए अपने संबोधन में कहा:
“अगर पश्चिम बिना किसी शर्त के सभी अन्यायपूर्ण प्रतिबंध हटाने के लिए गंभीर है, तो ईरान अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह बहाल करने को तैयार है।”
हालांकि उन्होंने साफ किया कि तेहरान किसी भी अस्थायी या अधूरी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा।
दुनिया की प्रतिक्रिया: समर्थन और चिंता दोनों
इस संभावित समझौते पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
- यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि यह “मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक अप्रसार प्रयासों को मजबूत करेगा।”
- वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “खतरनाक भ्रम” बताते हुए चेतावनी दी कि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
परमाणु स्थिति: आंकड़ों की हकीकत
संयुक्त राष्ट्र की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का यूरेनियम भंडार 2021 में 12,000 किलोग्राम से घटकर करीब 5,500 किलोग्राम रह गया था।
हालांकि हाल के महीनों में ईरान ने संवर्धन स्तर बढ़ाकर 60% तक पहुंचा दिया है, जो कि मूल JCPOA सीमा से काफी ज्यादा है और वैश्विक चिंता का कारण बना हुआ है।
क्या बदल सकता है यह समझौता?
अगर यह समझौता सफल होता है, तो एक दशक से अधिक समय बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। इससे पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक तस्वीर बदल सकती है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया को PAK-MED-2026-045-IRUS कोड दिया है, जो इसकी गंभीरता और संरचित प्रयास को दर्शाता है।
व्हाइट हाउस ने फिलहाल ट्रंप की भूमिका पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है, लेकिन एक प्रवक्ता ने कहा:
“हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना।”
निष्कर्ष
आने वाले कुछ हफ्ते इस पूरी प्रक्रिया के लिए बेहद अहम होंगे। इस्लामाबाद की बढ़ती भूमिका और ट्रंप की संभावित एंट्री ने इस वार्ता को हाई-स्टेक्स डिप्लोमैटिक गेम में बदल दिया है।
अब नजर इस बात पर है कि क्या वर्षों से रुकी बातचीत आखिरकार किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाती है या नहीं।
Discover more from Enoxx News (Hindi)
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
