शिमला: कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक (केसीसी बैंक) के वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, करीब 24 करोड़ रुपये की कथित छूट को लेकर सवाल उठने के बाद जांच एजेंसी ने बैंक से जुड़े अधिकारियों और कुछ पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है।
ईडी की प्रारंभिक जांच में ओटीएस योजना के तहत दी गई राहत और उसके औचित्य पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। आरोप है कि कुछ खातों में असामान्य रूप से अधिक छूट दी गई, जिससे बैंक को वित्तीय नुकसान हुआ हो सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर ईडी ने विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन एजेंसी ने संबंधित दस्तावेजों और फाइलों की जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों का कहना है कि मामले में बैंक प्रबंधन के तत्कालीन निर्णयों की समीक्षा की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि ओटीएस के तहत दी गई छूट बैंकिंग नियमों और आंतरिक प्रक्रियाओं के अनुरूप थी या नहीं। यदि अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई संभव है।
पृष्ठभूमि
वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना बैंकों द्वारा उन खाताधारकों के लिए लागू की जाती है, जिनके ऋण एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) की श्रेणी में चले जाते हैं। इसके तहत उधारकर्ता को एकमुश्त भुगतान कर बकाया राशि का निपटारा करने का अवसर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में बैंक कुछ ब्याज या जुर्माने में छूट दे सकते हैं, लेकिन यह छूट नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दी जानी चाहिए।
केसीसी बैंक प्रदेश का एक प्रमुख सहकारी बैंक है, जो हजारों खाताधारकों को सेवाएं प्रदान करता है। ऐसे में ओटीएस के तहत दी गई बड़ी राशि की छूट ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
संबंधित बयान
बैंक के एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि “ओटीएस योजना बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा है और नियमों के तहत लागू की जाती है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता का आरोप है, तो उसकी जांच होनी चाहिए।”
वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा है। विपक्षी दलों ने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा है कि यदि सार्वजनिक धन के प्रबंधन में कोई चूक हुई है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हालांकि, किसी भी राजनीतिक दल या नेता का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
ईडी की ओर से अभी तक किसी गिरफ्तारी या औपचारिक आरोप की पुष्टि नहीं की गई है। एजेंसी ने संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा और पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की है।
जनता पर प्रभाव
सहकारी बैंक ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी बैंक में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगते हैं, तो इसका असर खाताधारकों के विश्वास पर पड़ सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी जांचों का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ओटीएस योजनाएं उन उधारकर्ताओं के लिए राहत का माध्यम होती हैं, जो आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हों। लेकिन यदि छूट देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी होती है, तो इससे बैंक के संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
केसीसी बैंक के ओटीएस मामले में ईडी की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। एजेंसी दस्तावेजों और निर्णय प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल, संबंधित पक्षों से पूछताछ और रिकॉर्ड की जांच जारी है।
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