हिमाचल प्रदेश में सरकारी बसों में धक्का खाने वाले यात्रियों के लिए राहत की खबर है। खटारा होती बसों की जगह अब जल्द ही चमचमाती इलेक्ट्रिक बसें लेने वाली हैं। एचआरटीसी (HRTC) प्रबंधन ने 297 नई ई-बसों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
यह फैसला सिर्फ नई गाड़ियां खरीदने का नहीं है, बल्कि हिमाचल को ‘ग्रीन स्टेट’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार चाहती है कि पहाड़ों की हवा साफ रहे और डीजल का धुएं वाला दौर खत्म हो।
कैसी होंगी ये बसें? निगम को जो नई बसें मिल रही हैं, वे दो तरह की हैं—टाइप-1 और टाइप-3।
- टाइप-1 (छोटी बसें): ये बसें आकार में थोड़ी छोटी होंगी। इनका इस्तेमाल स्थानीय रूटों पर या उन संकरी सड़कों पर किया जाएगा जहां बड़ी बसें फंस जाती हैं।
- टाइप-3 (बड़ी बसें): ये लंबी दूरी के सफर के लिए होंगी। इनमें सीटें ज्यादा होंगी और ये एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले यात्रियों के लिए आरामदायक रहेंगी।
36 इलाकों में होगी ‘अग्निपरीक्षा’ मैदानों में इलेक्ट्रिक बस चलाना आसान है, लेकिन हिमाचल के पहाड़ अलग हैं। चढ़ाई चढ़ते वक्त बैटरी कितनी जल्दी खत्म होती है और उतरते वक्त ब्रेक कैसे काम करते हैं—यह जांचना बहुत जरूरी है। इसीलिए, एचआरटीसी ने इन बसों को सीधे सड़कों पर उतारने से पहले 36 क्षेत्रों का चयन किया है।
इन इलाकों में बसों का ट्रायल रन (Trial Run) होगा। यह देखा जाएगा कि एक बार चार्ज करने पर बस कितनी दूर जाती है और किन-किन स्टॉप्स पर चार्जिंग स्टेशन की जरूरत पड़ेगी।
ड्राइवरों को भी मिलेगी ट्रेनिंग इलेक्ट्रिक बस चलाने का तरीका डीजल बस से थोड़ा अलग होता है। इसलिए निगम अपने ड्राइवरों और टेक्निकल स्टाफ को भी इसके लिए तैयार कर रहा है। चार्जिंग स्टेशन का काम भी जोरों पर है।
कुल मिलाकर, आने वाले कुछ महीनों में हिमाचल की सड़कों पर शोर कम होगा और सफर ज्यादा सुहाना होगा। अब देखना यह है कि ये बसें पहाड़ों की कठिन परीक्षा में कितनी खरी उतरती हैं।
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