नई दिल्ली/बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति में एक भावुक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिवंगत नेता अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार अब राज्य की नई उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) होंगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने नेतृत्व को संभालने के लिए यह फैसला लिया है। हालांकि, इस नियुक्ति पर सियासत भी शुरू हो गई है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने स्पष्ट कहा है कि इस फैसले में पवार परिवार से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया और उन्हें सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण की जानकारी सिर्फ खबरों के जरिए मिली।
शरद पवार बोले– ‘मुझे कुछ नहीं पता’
बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब शरद पवार से पूछा गया कि क्या अजीत पवार के उत्तराधिकारी को चुनने की प्रक्रिया से उन्हें दूर रखा गया, तो उन्होंने संक्षिप्त और रूखा जवाब दिया—”मुझे नहीं पता।”
शरद पवार ने कहा, “हमें शपथ ग्रहण के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हमें भी इसके बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से ही पता चला।” जब उनसे यह पूछा गया कि क्या पवार परिवार का कोई सदस्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होगा, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। उनका यह बयान इशारा करता है कि राजनीतिक फैसलों और पारिवारिक रिश्तों के बीच की लकीर अब और गहरी हो गई है।
अजीत पवार की अधूरी ख्वाहिश: चाचा को देना चाहते थे ‘रीयूनियन’ का तोहफा
यह राजनीतिक घटनाक्रम जुलाई 2023 की उस बगावत की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जब एनसीपी दो गुटों में बंट गई थी। लेकिन अब एनसीपी (एसपी) नेता अंकुश काकड़े ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से अजीत पवार अपने चाचा (शरद पवार) के साथ रिश्ते सुधारने की गंभीर कोशिश कर रहे थे।
काकड़े ने बताया कि अजीत पवार 12 दिसंबर को शरद पवार के जन्मदिन पर उन्हें “पार्टी के पुनर्मिलन का तोहफा” देना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने शरद पवार के करीबी नेताओं, जैसे विट्ठल शेट मणियार और श्रीनिवास पाटिल से संपर्क किया था ताकि दोनों गुटों के विलय पर बात बन सके।
अजीत पवार का मानना था कि अगर दिसंबर में यह संभव न हो पाया, तो चुनाव के बाद दोनों गुट एक हो जाएंगे। लेकिन विमान हादसे ने इस योजना को अधूरा छोड़ दिया।
17 जनवरी की वह गुप्त बैठक
सूत्रों के अनुसार, 17 जनवरी को शरद पवार और अजीत पवार के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें पार्टी को फिर से एकजुट करने पर विस्तार से चर्चा की गई थी। खबर है कि दोनों नेताओं ने 12 फरवरी को आधिकारिक रूप से रीयूनियन (विलय) की घोषणा करने की योजना भी बना ली थी। जब शरद पवार से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि बैठक में अजीत पवार और जयंत पाटिल मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अब आगे की रणनीति पर फैसला जयंत पाटिल लेंगे।
हादसे ने बदल दी महाराष्ट्र की सियासत
यह सारा राजनीतिक उथल-पुथल उस दर्दनाक हादसे के बाद हो रहा है, जिसने सबको झकझोर दिया। अजीत पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे, जब उनका लियरजेट 45 विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। इस हादसे में अजीत पवार, पायलट सुमित कपूर, को-पायलट शांभवी पाठक, सुरक्षा अधिकारी विदिप जाधव और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की जान चली गई।
सुनेत्रा पवार की ताजपोशी के मायने
सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाकर एनसीपी अपने कैडर को एकजुट रखने और अजीत पवार की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश देना चाहती है। पार्टी की कोशिश है कि सहानुभूति की लहर और अजीत पवार के समर्थकों का भरोसा उनके परिवार के साथ बना रहे। लेकिन शरद पवार का यह कहना कि “परिवार को भरोसे में नहीं लिया गया”, यह बताता है कि अभी भी दोनों गुटों के बीच अविश्वास की खाई पूरी तरह भरी नहीं है।
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